पांच सौ धनुष की देहडी, प्रभुजी परम दयाल;
मुख्य प्रवेश द्वार, पर्वत की तलहटी। हिंदी पाठ:
यह मुख्य और अंतिम चैत्यवंदन है जो मूलनायक भगवान आदिनाथ के विशाल दरबार में किया जाता है。 स्थान:
पालीताणा के ५ चैत्यवंदन हैं:
मुख्य मंदिर के सामने स्थित पुंडरीक स्वामी की देरी। हिंदी पाठ: